जलझूलनी मेले के लिए भूमि का संकट!


मण्डफिया। श्रीसांवलियाजी मन्दिर विस्तार योजना के दूसरे चरण की भूमि अवाप्ति की कार्रवाई मंद गति से चलने एवं इस वर्ष मन्दिर का 'कोरिडोर' निर्माणाधीन होने से मेला स्थल की भूमि कम पडने से श्रद्धालुओं को परेशानी हो सकती है। मन्दिर में पिछले एक दशक से जिस गति से श्रद्धालुओं की आवक बढ रही है।

उसी के अनुरूप मन्दिर प्रशासन भूमि अवाप्त कर रहा है। प्रथम चरण में अवाप्त की गई भूमि पर पिछले आठ-दस वर्षो से मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रम व आतिशबाजी होती रही है। लेकिन इस वर्ष इस खाली भूमि पर मन्दिर प्रशासन ने कोरिडोर का निर्माण शुरू कर दिया। इससे अब मेला स्थल के लिए पर्याप्त भूमि का अभाव हो गया है।


अवार्ड जारी नहीं हुआ
मन्दिर प्रशासन ने मन्दिर विस्तार एवं मेला स्थल विकसित करने के लिए दो वर्ष पूर्व सौ बीघा से ज्यादा भूमि अवाप्ति की कार्रवाई शुरू की थी। प्रशासन ने सभी प्रक्रिया पूरी कर दी, इसके बावजूद भी अवार्ड आज तक जारी नहीं हो पाया है। जबकि यह प्रक्रिया छह माह पूर्व ही पूरी हो जानी थी। यदि अवार्ड जारी करने की प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती तो मेला इस अवाप्त शुदा भूमि पर आयोजित हो सकता था।


दो किलोमीटर दूर होते हैं सांस्कृतिक कार्यक्रम
सांवलियाजी मन्दिर मण्डल के पास मेले में होने वाले कवि सम्मेलन व भजन संध्या के लिए दो लाख लोगों के बैठने की क्षमता वाले स्थान की कमी होने से दोनों ही कार्यक्रम मंदिर परिसर से करीब दो किलोमीटर दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र परिसर में आयोजित होते हैं।


सत्ता परिवर्तन का प्रभाव
मन्दिर प्रशासन द्वारा अवाप्त की जाने वाली भूमि की अवाप्ति की दूसरी चरण की कार्रवाई मे सत्ता परिवर्तन का प्रभाव नजर आया। जो लोग भूमि अवाप्ति की कार्रवाई को पहले भेदभाव पूर्ण बता रहे थे, वहीं लोग आज सत्ता में आकर अवाप्ति की पूरी कार्रवाई को स्थगित कराने के उ“ा स्तरीय प्रयास में जुटे हुए है।

यह सही है कि कोरिडोर निर्माण के बाद मेला स्थल के लिए भूमि अपर्याप्त होगी। मेला स्थल, पार्किग व धर्मशाला निर्माण के लिए जमीन अवाप्त करना प्रस्तावित है। इस सम्बन्ध में भूमि अर्जन अधिकारी व निम्बाहेडा उपखण्ड अधिकारी मेले के बाद अवार्ड जारी करेंगे।'
-कन्हैयादास वैष्णव अध्यक्ष, मन्दिर मण्डल मण्डफिया

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