यज्ञ में आहुतियां देकर उतारी महाआरती

सप्त यज्ञों में अश्वमेघ यज्ञ की विशेषता
अश्वमेघ यज्ञ मंडप के आचार्य बद्रीनारायण पंचोली ने बताया कि इस यज्ञ के निमित्त सुंदर श्वेत घोड़ा लाया गया है। इसकी विधि पूर्वक पूजा की जाती है। 17 मई को यज्ञ पूर्णाहुति पर महापूजा कर सांवलिया सेठ को समर्पित कर दिया जाएगा। इस घोड़े पर किसी की सवारी नहीं की जाएगी समय-समय पर सुसज्जित कर धार्मिक आयोजनों में शोभायात्रा में यह अपनी छवि दिखाएगा।
श्रीमद्भागवत कथावाचन
यज्ञशाला के समीप हॉस्पिटल परिसर में वृन्दावन धाम के बाल व्यास रसिक बिहारी महाराज श्रीमद्भागवत कथा वाचन कर रहे हैं। शनिवार को खड़ेश्वरी महाराज रामदास महाराज के सानिध्य में शाम 4 बजे से हुई धर्मसभामें भागवत प्रसंगों के तहत श्रीकृष्ण की बाल लीला, पूतना वध, शकटासूर वध, बंशी वादन बाल सखाओं, गोवर्धन पर्वत धारण आदि लीलाओं के वृत्तांत सुनाए गए।
भास्कर न्यूज. चिकारड़ा/सांवलियाजी

श्रीकृष्ण धाम सांवलियाजी में भादसोड़ा रोड पर हॉस्पिटल के पास आयोजित 558 कुंडीय सप्त महायज्ञ में शनिवार को छटे दिन आचार्यों के निर्देशन में विधि विधान वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ श्रद्धालुओं ने हवन कुंडों में आहुतियां दी। लक्ष्यचंडी यज्ञ मंडप में आचार्यों ने दुर्गा सप्तशती पाठ का सामूहिक मंत्रोच्चार करवाकर श्रद्धालुओं से आहुतियां दिलवाई।

यज्ञ व्यवस्था से जुड़े गजराजसिंह कानावत औंकारसिंह सोलंकी ने बताया कि खड़ेश्वरी महाराज के सानिध्य में 9 से 17 मई तक चल रहे नौ दिवसीय महायज्ञ में आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं। यज्ञ शालाओं में प्रतिदिन सुबह नौ बजे से हवन किया जा रहा है।

यज्ञ समिति अध्यक्ष कन्हैयादास वैष्णव ने बताया कि स्थानीय मुस्लिम समाज का भी यज्ञ व्यवस्था में सहयोग मिल रहा है। अजीम साथी, शरीफ मोहम्मद मंसूरी आदि जल सेवा की व्यवस्था में जुटे हुए हैं। आयोजन में कन्हैयादास वैष्णव, शंकरलाल जाट, हरकलाल बसेर, औंकारसिंह सोलंकी, मोतीलाल तिवारी, जगदीश चौधरी, लक्ष्मण गुर्जर, भगवानलाल सोनी, मनोहरलाल जैन, अनिल तिवारी, जानकीदास वैष्णव, शंकरलाल शर्मा, नारायण गुर्जर, संजय सेन, सीतादेवी शर्मा, स्नेहलता तिवारी आदि सेवाएं दे रहे हैं।

सांवलियाजी में 558 कुंडीय महायज्ञ शुरू

Bhaskar News - ChittorGarh
कलश यात्रा निकली, जगह जगह किया स्वागत, आयोजन में उमड़े श्रद्धालु, बग्घी में खड़ेश्वरी महाराज एवं लकड़ी के रथ में सांवलियाजी की छवि विराजित थी

भास्कर न्यूज & सांवलियाजी

कृष्णधाम सांवलियाजी में बैकुंठधाम के संत खड़ेश्वरी महाराज के सानिध्य में 558 कुंडीय सप्त महायज्ञ का शुभारंभ सोमवार को हुआ। इस अवसर पर निकली कलश यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

भगवान सांवला सेठ की राजभोग आरती के साथ ही यशोदा विहार चौक से शोभायात्रा शुरू हुई। इसमें पीछे बग्घी में खड़ेश्वरी महाराज एवं लकड़ी के रथ में सांवलियाजी की छवि विराजित थी। आगे ऊंट व घोड़ों पर साधु संत चल रहे थे। शोभायात्रा यज्ञनगर पहुंची। शोभायात्रा का जगह जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया।

मुख्य आचार्य पंडित बद्रीनारायण पंचोली व पं. उमेश शास्त्री के सानिध्य में मंडलों की रचना कर स्थापना की गई। दिन में जल कलशों की पूजा हुई।

कार्यक्रम में यज्ञ समिति अध्यक्ष कन्हैया दास वैष्णव, मंत्री मोतीलाल तिवारी, स्थानीय समिति अध्यक्ष भगवानलाल सोनी, मंत्री सत्यनारायण शर्मा, उपाध्यक्ष शंकरलाल जाट, सचिव गजराजसिंह, पूर्व सरपंच हजारीदास वैष्णव, शीतल डाड, मंदिर मंडल के प्रशासनिक अधिकारी किशन लाल शर्मा, विनोद सोनी, विहिप बजरंगदल के अशोक तिवारी, संजय सेन, शिव जायसवाल, नारायण गुर्जर, प्रकाश सेन, कंवर लाल गुर्जर, विश्वास वैष्णव, मदनलाल तिवारी समेत कार्यकर्ताओं व श्रद्धालुओं ने भाग लेकर सहयोग किया।

सड़क पर बिछी फूलों की चादर

शोभायात्रा मे हुई भरपूर पुष्पवर्षा से मार्ग पर गुलाब के पत्तियों की चादर बिछ गई। गर्मी के द्रष्टिगत एवं मार्ग शुद्धिकरण के लिए शोभायात्रा में सबसे आगे पानी का टैंकर चल रहा था, जो सड़क पर पानी का छिड़काव कर रहा था, जिससे शोभायात्रा में शामिल लोगो को राहत मिल सके।

आज के कार्यक्रम

मंगलवार को सप्त महायज्ञ कार्यक्रमों में आवासित देवताओं तथा मंडलों की पूजा की जाएगी। इसके बाद अरणी मंथन के साथ ही हवन एवं आहुतियां का शुभारंभ होगा। रात में रसिक बिहारी महाराज द्वारा भागवत कथा का वाचन किया जाएगा।

55८ कुंडीय महायज्ञ 9 मई से

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सात प्रकार के होंगे यज्ञ
महायज्ञ के दौरान सात प्रकार के यज्ञ कराए जाएंगे। इनमें अश्वमेघ, राजसूयी, लक्ष चंडी, इंद्र, देवनारायण, रुद्र तथा नवग्रह महायज्ञ हैं। अश्वमेघ यज्ञ के बाद सफेद घोड़े का पूजन कर छोड़ा जाएगा। अश्वमेघ यज्ञ प्रधान आचार्य डॉ. बद्रीनारायण पंचोली संपन्न कराएंगे।


यज्ञशाला पर खर्च होंगे सवा 11 लाख: सचिव गजराज सिंह कानावत ने बताया कि विश्व कल्याण के लिए होने वाले 55 कुंडीय महायज्ञ में 11 लाख 11 हजार रुपए की लागत से यज्ञशाला तैयार की जा रही है। 60 हजार रुपए की लागत से चबूतरा निर्माण सवा लाख रुपए की लागत से हवन कुंड तैयार कराए जा रहे हैं।

सांवलियाजी. पत्रकार वार्ता में महायज्ञ की जानकारी देते पदाधिकारी उपस्थित खड़ेश्वरी महाराज।
कलशयात्रा के साथ होगा यज्ञ का शुभारंभ, भागवत कथा होगी, समापन पर सांवलिया सेठ की झांकी सजाकर भोग लगाया जाएगा

भास्कर न्यूज & सांवलियाजी

राष्ट्र में शांति, विश्व कल्याण सुवृष्टि की कामना के लिए भीलवाड़ा के बैकुंठधाम मंदिर के संत खड़ेश्वरी महाराज के सानिध्य में नौ मई से 55 कुंडीय महायज्ञ होगा। यज्ञ की पूर्णाहुति 17 मई को होगी। बाईपास पर बनाए गए यज्ञ नगर में महायज्ञ की तैयारी चल रही है जहां भव्य यज्ञशाला का निर्माण किया जा रहा है।

यज्ञ आयोजन समिति अध्यक्ष मंडफिया सरपंच कन्हैया दास वैष्णव ने पत्रकार वार्ता में बताया कि नौ मई को कलशयात्रा जुलूस के साथ महायज्ञ शुरू होगा। प्रतिदिन सुबह नौ से दो बजे तक यज्ञ में आहुतियां दी जाएंगी। महायज्ञ के प्रमुख आचार्य पंडित बद्रीनारायण पंचोली होंगे। वैष्णव ने बताया कि अश्वमेघ यज्ञ के लिए सफेद घोड़ा लाकर उसकी पूजा की जाएगी। महायज्ञ में दोपहर तीन बजे से शाम छह बजे तक बाल न्यास रसिक बिहारी महाराज के मुखारबिंद से भागवत कथा का वाचन होगा। यज्ञ में हवन के लिए बैठने वालों का पंजीकरण चल रहा है। नौ दिन तक घी की आहुति देने वाले यजमान जोड़े से 5100 तथा साकल्य की आहुति देने वाले जोड़े के लिए 2100 रुपए सहयोग राशि निर्धारित की गई है। यज्ञ में प्राप्त होने वाली सहयोग राशि में से शेष बचने वाली राशि को यज्ञ समापन के बाद गौशाला को दान स्वरूप दी जाएगी। महायज्ञ का समापन 17 मई पूर्णिमा को होगा। इस दिन भगवान सांवलिया सेठ की झांकी सजाकर छप्पन भोग लगाया जाएगा।

वैष्णव ने बताया कि महायज्ञ में प्रतिदिन लगभग 10 हजार लोगों के शामिल होने का अनुमान है। उसी के अनुसार तैयारियां की जा रही हैं। यज्ञकर्ताओं, यजमानों, पंडितों के साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था यज्ञ नगर में की जाएगी। भोजनशाला का निर्माण रैफरल अस्पताल परिसर में होगा। जिले के अब तक के सबसे भव्य महायज्ञ आयोजन के लिए जिलेभर सहित आसपास के गांव, कस्बों के लोगों द्वारा तन, मन,धन से सहयोग किया जा रहा है। इस अवसर पर यज्ञ समिति मंत्री मोतीलाल तिवारी, सत्यनारायण शर्मा, मनोहर जैन, भगवानलाल सोनी, शंकरलाल जाट, रतनसिंह गंठेड़ी, केसरीमल साहू, सुनील लोढ़ा, शंकर शर्मा चित्तौडगढ़़ सहित कई लोग उपस्थित थे।

निखरने लगा सांवलियाजी मंदिर का स्वरूप

भैरूलाल सोनी & सांवलियाजी
गुजरात के अक्षरधाम की तर्ज पर मंदिर कर मुख्य शिखर 121 फीट ऊंचा है जो दूर से दिखाई देगा। मंदिर में मुख्य शिखर के निकट 70 फीट उंचाई के दो शिखर, तीन गुम्बद तथा छ: गर्भगृह बनाएं गए हैं। नीचे स्ट्रांग रूम तथा बाहर लम्बा चौड़ा बरामदा बना है। मंदिर के निमार्ण में बंशी पहाड़पुरा, धौलपुर के लाल पत्थर का उपयोग किया गया है। जिन पर सुंदर नयनाभिराम फूल पत्तियां, वाद्य यंत्र बजाते हुए नर-नारी, द्वारपाल व देवी-देवताओ की छवियां उकेरी गई है। मंदिर के द्वारों पर शीशम के किवाड़ मय नक्काशी के लगाए गए है। सांवलियाजी के स्थापना स्थल पर रजत मंदिर व आसन है। अब पृष्ठ भाग में सोने की पिछवाई बनना प्रस्तावित है। इस मंदिर के निमार्ण में कहीं भी लोहे का उपयोग नहीं किया गया है। सांवलियाजी मंदिर को ठण्डा रखने के लिए मंदिर में लगभग 10 लाख रूपये की लागत से कूलिंग सिस्टम लगाया गया है।

लगभग डेढ़ शताब्दी पुराने मंदिर में विराजीत श्री सांवलियाजीका विग्रह मूल रूप से विष्णु भगवान के चतुर्भुज स्वरूप है, जो हर किसी को आकर्षित करता है, लेकिन आरम्भ से ही इनकी पूजा कृष्ण के रूप में की जाती रही है। सांवलियाजी के इस गांव में आगमन से लेकर वर्तमान तक इनके चमत्कारो को लेकर कई किवदंतियां प्रचलित हैं। सांवलियाजी के द्वार पर सच्चे मन से की गई प्रार्थना व मनोकामना अवश्य पूरी होती है। मंदिर परिसर में शिव परिवार, हनुमानजी व चामुण्डा माता के मंदिर भी है, उनके लिए भी नए मंदिर बनकर तैयार हो चुके हंै। गुप्तेश्वर महादेव का मंदिर बनकर भगवान यथावत विराजित है। यूं तो भगवान सांवलियाजी के यहां हर अमावस्या को मासिक मेला लगता है, लेकिन मुख्य मेला जलझूलनी एकादशी के दिन लगता है। दोपहर में 12 बजे से 2.30 बजे को छोड़कर सुबह 5.30 बजे से रात्रि 11 बजे तक दर्शन होते है।

सांवला सेठ के मंदिर में बढ़े भक्त भंडार
पिछले तीन दशको में ही तेजी से बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या व भण्डार की आय से चित्तौडग़ढ़ जिले का सांवलियाजी मंदिर आज राजस्थान के प्रमुख कृष्णधाम के रूप में सामने आ गया है। मेवाड़ एवं मालवा क्षेत्र के अनन्य आराध्य सांवलियाजी महाराज के मंदिर की ख्याति व आय लगभग डेढ़ सौ बरस पूर्व हुई स्थापना के समय से ही निरंतर बढ़ती ही रही है। 1980 से लेकर 2009 तक के काल में तो मंदिर की ख्याति में आश्चर्यजनक रूप से फैलाव आया है। जिसमें गुजरात के अक्षरधाम की तर्ज पर भव्य मंदिर तथा बस स्टैंड, विश्रांतिगृह, धर्मशालाओं, चिकित्सालयों, गोशाला व महाविद्यालय आदि बन गए हंै। आज मंदिर में देश के कोने कोने से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं तथा प्रतिवर्ष करोड़ों रूपए की आय भण्डार से हो रही है। निरंतर निमार्ण कार्य चलने से लोग कहने लगे हैं कि भगवान सांवलिया सेठ की यहां अमर टांकी है और भंडार से भरपूर राशि निकलने के कारण ही भगवान सांवलियाजी को सांवलिया सेठ कहा जाने लगा जो कि अनूठी बात है क्योंकि आमतौर पर कहीं भी भगवान के नाम के आगे सेठ नहीं लगता है।



50 करोड़ का मंदिर

115 बीघा भूमि अवाप्ती की कार्रवाई शुरू

मंदिर प्रशासन का इतिहास

अक्षरधाम की तर्ज पर हो रहा निर्माण

सांवलियाजी मंदिर के आरम्भिक काल में तो गांव एवं क्षेत्र के लोग मिलकर काम करते रहते थे। काम बढऩे पर 1956 में कार्यकारिणी का पंजीयन कराया गया तथा क्षेत्र के गांवों से 65 सदस्य होते थे। जिनमें से बनी 16 जनों की कार्यकारिणी व्यवस्था संचालित करती थीं। अनियमितता की शिकायत पर वर्ष 1991 में राज्य सरकार ने मंदिर को अधिगृहित कर लिया तब से सरकार के निर्देशन से बना 11 सदस्यीय बोर्ड इसका संचालन करता है। जिसमें देवस्थान संभागीय आयुक्त, कलेक्टर व अतिरिक्त कलेक्टर के साथ जनप्रतिनिधि सदस्य होते हैं। बोर्ड न रहने की अवस्था में कलेक्टर को प्रशासक बनाया जाता है। चित्तौडग़ढ़ जिले के अतिरिक्त जिला कलेक्टर प्रशासक पदेन रूप से मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी होते हैं।



कॉरीडोर निर्माण पूर्ण होने के साथ ही मंदिर के सामने तथा बांई ओर के क्षेत्र में गार्डन, सड़क व मेला ग्राउंड आदि योजनाएं प्रस्तावित है, जिसके लिए वर्ष 2007 में ही मंदिर प्रशासन ने इस क्षेत्र में आने वाली लगभग 115 बीघा भूमि की अवाप्ती की कार्रवाई शुरू कर दी थी। इसमें अभी भूमि अवाप्ती की धारा 9 व अवार्ड नोटिस जारी किए जाने की प्रकिया चल रही है।



पूर्व में दो बार पुननिर्मित हो चुके सांवलियाजी मंदिर की महत्वाकांक्षी मंदिर विस्तार व उद्यान निमार्ण योजना 1996 में तत्कालीन बोर्ड द्वारा लाई गई। इसमे लगभग 20 करोड़ रूपए की लागत से मुख्य मंदिर निर्माण कराया गया। अब केवल शिखर पर कलश चढ़ाने का काम शेष है। अगले चरण में 24 करोड़ रुपए की लागत से कॉरीडोर का निमार्ण हो रहा है। कलश व इस पर सोना एवं अन्य कार्य मिलाकर लगभग दो साल में मुख्य मंदिर व कॉरीडोर बन कर पूर्ण होगा। इस पर कुल लगभग 50 करोड़ रूपये खर्च होगे।





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