हजारों यात्री पहुंचे सांवला के द्वार

सांवलियाजी
कृष्णधाम सांवलियाजी में रविवार को श्रद्धालुओं का सैलाब उमडऩे से दर्शनों के लिए दिनभर कतारें लगी रही। हाथों में पूजा की थाली और प्रसाद लिए कतारों में खड़े श्रद्धालु सांवलिया सेठ के जयकारों से समूचा मंदिर परिसर गूंज उठा।

मंगला आरती के बाद पुजारी नारायणदास वैष्णव ने भगवान को गंगाजल से स्नान करवा इत्रादि का लेप किया एवं नवीन वस्त्र धारण करवाए। पुष्पमाला, मोरपंख व छोगा आदि धारण करवा सुंदर शृंगार किया। मुख्य आरती के बाद राजभोग लगाया गया। शीतकालीन अवकाश, निम्बाहेड़ा के पैदलयात्रियों का समूह एवं रविवार होने से जल्दी सुबह से ही मंदिर में दर्शनों की कतारें लगना शुरू हो गई। मंदिर मंडल अध्यक्ष कन्हैयादास वैष्णव, भादसोड़ा थानाधिकारी मिट्ठूलाल मेघवाल, गणपतसिंह शेखावत व भगवानलाल चुतर्वेदी व्यवस्थाओं में लगे रहे।

शार्टकट श्रद्धालुओं ने किया परेशान

दर्शनों के लिए लगी कतारों को छोड़ अपने प्रभाव व रसूख के जोर पर शार्टकट दर्शनों के लिए घुसे श्रद्धालुओं से कतारों में लगे श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों द्वारा अपनी मनमर्जी से कई लोगों को दर्शनों के लिए सीधे अंदिर घुसाने से अन्य श्रद्धालुओं को नाराज होते देखा गया।

बालभोग प्रसाद की बिक्री ने तोड़ा रिकार्ड

कृष्णधाम सांवलियाजी मंदिर में श्रद्धालुओं के बढऩे के साथ ही बाल भोग प्रसाद की रिकार्ड बिक्री हो रही है। पिछले तीन दिनों से रोजाना एक लाख रुपए के प्रसाद की बिक्री हो रही है। व्यवस्थापक कालूलाल तेली ने बताया कि वर्तमान में इससे अधिक प्रसाद तैयार करना संभव नहीं है। कई श्रद्धालुओं को बिना प्रसाद लिए ही वापस लौटना पड़ा। गत अमावस्या पर साढ़े तीन लाख रुपए के प्रसाद की बिक्री हुई। मंदिर मंडल अध्यक्ष वैष्णव ने बताया कि राजस्थान, मध्यप्रदेश के साथ ही गुजराती श्रद्धालुओं की आवक में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

अंबामाता के भक्त उमड़े सांवलिया दरबार में

एक दशक से पदयात्रा कर सांवलियाजी पहुंचने वाले अंबा माता सेवा समिति निम्बाहेड़ा के पदयात्री रविवार को बड़ी संख्या में सांवलियाजी पहुंचे। समिति अध्यक्ष चेन सिंह ने बताया कि शनिवार रात तीन बजे अंबा माता के दर्शन कर पदयात्रियों को पहला जत्था सांवलियाजी के दर्शनों के लिए रवाना हुआ। उसके बाद सुबह छह बजे तक अलग-अलग जत्थों में पदयात्री रवाना होते रहे।

इस बार समिति के तत्वावधानमें १५ हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने पदयात्रा कर भगवान सांवलिया सेठ के

दर्शन किए।

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